Sunday, January 6, 2019

Hum to aashiq hain tumhare naam ke

ہم چلے کیا  ہاتھ حق کا تھام کے
داغ    دامن     پر  لگے   الزام کے

لوٹ  ڈالا   ہے حکومت   نے ہمیں
اب کہاں قسمت میں دن آرام کے

ڈگریاں   لیکر   پھرا کرتے ہیں ہم
راستے   ملتے   نہیں   ہے  کام کے

مغربی تہذیب   سے   یہ پوچھئے
وقت اچھے اب کہاں ہیں شام کے

آ رہا    ہے    پھر الیکشن  دیکھئے
نام    ابھریں گے    کئی بدنام کے

زندگی کے  ساتھ  جو حالات ہیں
فلسفے    ہیں    گردشِ   ایام کے

تم غزل  لکھتے    رہو ذیشان بس
ہم تو   عاشق ہیں تمہارے نام کے

✍ ذیشان آعظمی

हम चले क्या हाथ हक़  का थाम के
दाग़  दामन  पर   लगे    इल्ज़ाम के

लूट   डाला है     हुकूमत    ने   हमें
अब कहां किस्मत में दिन आराम के

डिग्रियां    लेकर   फिरा करते हैं हम
रास्ते मिलते   नहीं   है    काम    के

मग़रिबी    तहज़ीब    से यह पूछिए
वक़्त अच्छे    अब कहां  है शाम के

आ रहा    है फिर इलेक्शन   देखिए
नाम    उभरेंगे    कई    बदनाम  के

जिंदगी के     साथ    जो हालात हैं
फलसफे    है गर्दिशे    अय्याम   के

तुम ग़ज़ल लिखते रहो ज़ीशान बस
हम तो आशिक    हे तुम्हारे नाम के

✍ ज़ीशान आज़मी

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