Monday, April 8, 2019

Darwaaze khule sainkadon is maahe jabeeN par

نظروں نے میری   دیکھا ہے  یہ عرش بریں پر
ایک    معجزہ    احمد   کا   ہے قرآن، زمیں پر

ہم  سے    تو   منافق  بھی کہیں گے   یہ یقیناً
تم  جیسا نمونہ    نہیں    دیکھا   ہے کہیں  پر

یہ دوستوں کی دیکھئے فطرت بھی  عجب ہے
وہ دیکھتے   ہیں   ہم  کو مگر دھیان کہیں پر

وہ اب بھی  اسی   طرح  مجھے  چاہتی ہوگی
اتنا تو   بھروسہ    ہے مجھے  دل کے مکیں پر

ہم خواب   نہیں   دیکھتے   ہیں ان کے علاوہ
ہر خواب   نچھاور  ہے وہ  اک شوخ حسیں پر

نورانی   ہے   چہرہ    نبی   کا،    علم و ہنر کے
دروازے  کھلے   سینکڑوں  اس   ماہ جبیں پر

کچھ یوں بھی خدا نے دی ہے ذیشان کو شہرت
ہے فکر    بلندی   پہ   مگر    پا    ہے  زمیں پر

✍ ذیشان آعظمی

नजरों     ने मेरी      देखा    है     यह     अरशे    बरीं पर
एक    मोजेज़ा       अहमद का    है क़ुरआन,    जमीं पर

हमसे तो मुनाफिक़ भी कहेंगे फिर भी कहेंगे यह यकीनन
तुम       जैसा     नमूना       नहीं      देखा     है कहीं पर

यह      दोस्तों       की      देखिए     फितरत भी अजब है
वह   देखते    हैं       हमको    मगर     ध्यान     कहीं पर

वह    अब    भी     उसी    तरह    मुझे    चाहती    होगी
इतना    तो    भरोसा     है     मुझे     दिल   के  मकीं पर

हम     ख्वाब नहीं        देखते     हैं      उनके     अलावा
हर ख्वाब     निछावर      है     वह    एक शौख़ हंसी पर

नूरानी     है       चेहरा      नबी का,          इल्मो हुनर के
दरवाजे खुले      सैंकड़ों       इस          माहे    जबीं पर

कुछ युं    भी      खुदा    ने दी है     ज़ीशान  को शोहरत
है      फिक्र      बुलंदी     पे      मगर     पा   है जमीं पर

✍ ज़ीशान आज़मी

Tuesday, April 2, 2019

Kis ko khabar hai kon sa aansoo qabool ho

رحمت کا    قبر    پر میری    یا   رب نزول ہو
وہ آئے    اس کے    ہاتھ    عقیدت کا پھول ہو

میں دور   اس    لئے ہوں شراب و شباب سے
منظور ہی    نہیں    مجھے   خرچہ فضول ہو

اس دور    میں    کمی نہیں ظالم کے ظلم کی
مظلوم    کی    دعا مرے     خالق    قبول  ہو

وعدہ خلافی   مجھ  سے کیا تجھ کو کیا ملا
لعنت خدا کی تجھ پہ ترے منہ میں دھول ہو

میں روکتا    ہوں سب    کو برائی سے یا خدا
چلتا ہوں    نیک  راہ پہ مجھ سے نہ بھول ہو

ظالم تو   آنسوؤں    سے    ڈرا کر    کہ آہ سے
کس کو    خبر ہے    کون   سا آنسو   قبول ہو

ذیشان کی    تمنا    ہے   یا رب وہ خواب میں
جب    دیکھے   رات  میں تو نبی و رسول ہو

✍ ذیشان آعظمی

रहमत का    कब्र पर     मेरी  या रब नूज़ूल हो
वह आए     उसके हाथ अकीदत  का फूल हो

मैं दूर      इसलिए    हूं      शराबो     शबाब से
मंज़ूर ही    नहीं    मुझे     खर्चा    फुज़ूल   हो

इस दौर में    कमी नहीं   ज़ालिम के ज़ुल्म की
मज़लूम    की दुआ    मेरे ख़ालिक़   क़ुबूल हो

वादा खिलाफी मुझसे किया तुझको क्या मिला
लानत   खुदा की    तुझ पे तेरे   मुंह में धूल हो

मैं रोकता    हूं सब    को    बुराई   से, या खुदा
चलता हूं नेक     राह पे     मुझ    से न भूल हो

ज़ालिम तू    आंसुओं से डरा कर    के आह से
किसको खबर    है कौन    सा  आंसू क़ुबूल हो

ज़ीशान की तमन्ना है    या रब    वह  ख्वाब मे
जब देखे    रात में तो     नबी    ओ    रसूल हो

✍ ज़ीशान आज़मी

Sunday, March 31, 2019

Aur bhi dukh hai zamane me mohabbat ke siwa

जिंदगी बेकार है    ऐ दोस्त    क़ुरबत  के सिवा
दुश्मनी से कुछ नहीं मिलता है नफरत के सिवा

काम धंधे छोड़कर    ए दोस्तों    रोते    हो क्यों
और भी दुख  हैं ज़माने   में   मोहब्बत के सिवा

✍ ज़ीशान आज़मी

زندگی    بیکار   ہے   اے   دوست  قربت کے سوا
دشمنی  سے   کچھ نہیں   ملتا ہے نفرت کے سوا

کام دھندے چھوڑ کر اے دوستوں روتے ہو کیوں
اور بھی    دکھ    ہے  زمانے میں محبت کے سوا

✍ ذیشان آعظمی

Monday, March 25, 2019

Khoon ke Rishtey wafaa ki jo alamat hote

مال و زر   ہوتے   تو ہم   صاحبِ عزت ہوتے
آپ لوگوں    کی دعاؤں    سے  سلامت ہوتے

سب کے اعمال اگر   ماتھے پہ لکھ دیتا خدا
چھوڑ   کر  کچھ کو سبھی قابلِ نفرت ہوتے

کاش اس نے    کبھی    اک    بار   بلایا ہوتا
ان کے    دربار   میں ہم حاضرِ خدمت ہوتے

دور   اس  دیس سے جانا تھا ہمیشہ کے لئے
دوست ہم آپ کے تھے بول کے رخصت ہوتے

پڑھتے  اشعار ہمارے  بھی کھبی فرصت سے
آپ کی    نظروں   میں ہم لائقِ مدحت ہوتے

قدر ہوتی   ہی نہیں  دوستوں کی دنیا میں
خون کے   رشتے   وفا کی  جو علامت ہوتے

خلق  ذیشان   خدا    کرتا    نہیں دوزخ  کو
سب   اگر دنیا    میں   پابندِ  شریعت  ہوتے

✍ ذیشان آعظمی

Monday, March 18, 2019

Jis Shakhs ki zubaan pe shuk-e-khuda rahe

मेरी    हयात कि    तेरे लब   पर दुआ  रहे
मैं   चाहता    नहीं  तू    सदा    बेवफा रहे

एक बार मिल के तू मेरे  दिल को क़रार दे
ज़ख्मे  जिगर   ना मेरा   हमेशा   हरा  रहे

दिल है   कि भूलता  नहीं  तस्वीर यार की
कोशिश तो की थी दिल में कोई दूसरा रहे

मिलता हूं   रोज-रोज   मैं   महबूब  से मेरे
आंखों में   ऐसा   ख्वाब   हमेशा सजा रहे

खुशबू की  तरह महकेंगे अशआर  भी मेरे
यह माजरा    है इश्क़ का    कैसे  छुपा रहे

मायूस   जिंदगी    से रहे    कैसे वह भला
जिस शख्स की ज़ुबान पर शुकरे खुदा रहे

ज़ीशान    कामयाब    तू होगा   जरूर गर
रब पर    यक़ीन    और लबों पर दुआ रहे

✍ ज़ीशान आज़मी

میری     حیات کی      ترے      لب   دعا رہے
میں   چاہتا    نہیں   تو     سدا    بے وفا رہے

اک   بار    مل   کے تو مرے  دل  کو قرار دے
زخمِ جگر      نہ     میرا    ہمیشہ     ہرا   رہے

دل ہے   کہ   بھولتا    نہیں   تصویر    یار کی
کوشش تو کی تھی دل میں کوئی دوسرا رہے

ملتا ہوں   روز   روز میں محبوب  سے  مرے
آنکھوں   میں  ایسا خواب ہمیشہ   سجا رہے

خوشبو کی طرح مہکے نگے اشعار  بھی مرے
یہ   ماجرا    ہے   عشق کا   کیسے  چھپا رہے

مایوس    زندگی    سے   رہے کیسے  وہ بھلا
جس    شخص    کی  زبان پہ  شکرِ خدا رہے

ذیشان    کامیاب     تو     ہوگا    ضرور   گر
رب پر    یقین     اور      لبوں    پر  دعا  رہے

✍ ذیشان آعظمی