Wednesday, January 16, 2019

Ujlat se kab milegi masarrat jahan me

तौफीक़   ए खुदा मुझे   दे    इस जहान में
मैं  कामयाब   हो    सकूं हर    इम्तिहान में

हर काम छोड़   दिजिये बस   रब के वास्ते
बंदे को जब पुकारे  मुअज्ज़िन आजा़न  में

उलफत है,  दोस्ती है, मोहब्बत   है प्यार है
अलफाज़   कितने प्यारे   है उर्दू  जबान में

एक बार दोस्तों   से मुलाक़ात   कर   कभी
तू फर्क़ जान   जाएगा घर   और मकान में

हरगिज़ नहीं   मिलेगी जमीं पर कभी तुम्हें
मंजिल है हर बशर की फक़त आसमान में

मैं इंतजार   करता हूं    यह   मुद्दतों से बस
उजलत से  कब मिलेगी मसर्रत जहान में

ज़ीशान शायरी    तेरी     आसान है  बहुत
दिल में रखा किसी   ने किसी  ने गुमान में

✍ ज़ीशान आज़मी

उजलत = hurry, fast
मसर्रत = joy, cheerfulness

توفیق اے خدا مجھے دے اس جہان میں
میں    کامیاب   ہو سکو   ہر امتحان میں

ہر کام چھوڑ   دیجئے بس رب کے واسطے
بندے کو    جب  پکارے   مؤذن اذان میں

الفت ہے،  دوستی ہے،  محبت  ہے پیار ہے
الفاظ کتنے   پیارے   ہیں   اردو زبان میں

اک بار   دوستوں   سے ملاقات  کر کبھی
تو فرق   جان جائے گا گھر اور مکان میں

ہرگز نہیں   ملےگی  زمیں پر کبھی تمہیں
منزل    ہے ہر    بشر  کی فقط آسمان میں

میں انتظار  کرتا ہوں   یہ مدتوں سے بس
عجلت سے کب ملے گی مسرت جہان میں

ذیشان      شاعری   تیری     آسان ہے بہت
دل میں رکھا کسی نے کسی نے گمان میں

✍ ذیشان آعظمی

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