Sunday, February 10, 2019

Ek zarra e haqeer hoo mai khaakdaan me

क़ुरआं किताबें हक़ है खुदा   की जाहान में
यह दस्तेयाब    हमको   है अरबी ज़ुबान में

हर काम    हम शुरू    करें   रब के नाम से
फिर कामयाबी तय है हर  एक इम्तिहान में

ऐ बंद ऐ    खुदा तू     परेशां    है क्यों  यहां
रोज़ी लिखी    हुई है    तेरी     आसमान में

मिमबर से हक़   बयान तू करता नही अगर
तो दम    नहीं     है    मौलवी तेरे बयान में

दुनिया   में सबसे अच्छा हमारा ही मुल्क है
हम को    सुकून    मिलता है   हिंदुस्तान में

ख़ालिक़ की कायनात   में औक़ात क्या मेरी
एक ज़र्र ए   हक़ीर    हूं मैं     खाकदान   में

इल्मो    हुनर   दिया   तुझे    परवरदिगार ने
ज़ीशान हम्द पढ़ता जा ख़ालिक़ की शान में

✍ ज़ीशान आज़मी

قرآں   کتابِ حق ہے  خدا کی جہان میں
یہ    دستیاب   ہم کو ہے عربی زبان میں

ہر کام   ہم   شروع کریں رب کے نام سے
پھر کامیابی   طے   ہے ہراک امتحان میں

اے بندئے خدا  تو پریشاں ہے کیوں یہاں
روزی   لکھی   ہوئی ہے تیری آسمان میں

ممبر   سے   حق   بیان   تو کرتا نہیں اگر
تو دم    نہیں   ہے مولوی تیرے بیان میں

دنیا میں سب سے اچھا ہمارا ہی ملک ہے
ہم کو    سکون    ملتا   ہے ہندوستان میں

خالق   کی کائنات   میں اوقات کیا میری
ایک     ذرہ حقیر ہوں    میں خاکدان میں

علم  و ہنر    دیا    تجھے    پروردگار  نے
ذیشان حمد پڑھتا جا خالق کی شان میں

✍ ذیشان آعظمی