Sunday, March 31, 2019

Aur bhi dukh hai zamane me mohabbat ke siwa

जिंदगी बेकार है    ऐ दोस्त    क़ुरबत  के सिवा
दुश्मनी से कुछ नहीं मिलता है नफरत के सिवा

काम धंधे छोड़कर    ए दोस्तों    रोते    हो क्यों
और भी दुख  हैं ज़माने   में   मोहब्बत के सिवा

✍ ज़ीशान आज़मी

زندگی    بیکار   ہے   اے   دوست  قربت کے سوا
دشمنی  سے   کچھ نہیں   ملتا ہے نفرت کے سوا

کام دھندے چھوڑ کر اے دوستوں روتے ہو کیوں
اور بھی    دکھ    ہے  زمانے میں محبت کے سوا

✍ ذیشان آعظمی

Monday, March 25, 2019

Khoon ke Rishtey wafaa ki jo alamat hote

مال و زر   ہوتے   تو ہم   صاحبِ عزت ہوتے
آپ لوگوں    کی دعاؤں    سے  سلامت ہوتے

سب کے اعمال اگر   ماتھے پہ لکھ دیتا خدا
چھوڑ   کر  کچھ کو سبھی قابلِ نفرت ہوتے

کاش اس نے    کبھی    اک    بار   بلایا ہوتا
ان کے    دربار   میں ہم حاضرِ خدمت ہوتے

دور   اس  دیس سے جانا تھا ہمیشہ کے لئے
دوست ہم آپ کے تھے بول کے رخصت ہوتے

پڑھتے  اشعار ہمارے  بھی کھبی فرصت سے
آپ کی    نظروں   میں ہم لائقِ مدحت ہوتے

قدر ہوتی   ہی نہیں  دوستوں کی دنیا میں
خون کے   رشتے   وفا کی  جو علامت ہوتے

خلق  ذیشان   خدا    کرتا    نہیں دوزخ  کو
سب   اگر دنیا    میں   پابندِ  شریعت  ہوتے

✍ ذیشان آعظمی

Monday, March 18, 2019

Jis Shakhs ki zubaan pe shuk-e-khuda rahe

मेरी    हयात कि    तेरे लब   पर दुआ  रहे
मैं   चाहता    नहीं  तू    सदा    बेवफा रहे

एक बार मिल के तू मेरे  दिल को क़रार दे
ज़ख्मे  जिगर   ना मेरा   हमेशा   हरा  रहे

दिल है   कि भूलता  नहीं  तस्वीर यार की
कोशिश तो की थी दिल में कोई दूसरा रहे

मिलता हूं   रोज-रोज   मैं   महबूब  से मेरे
आंखों में   ऐसा   ख्वाब   हमेशा सजा रहे

खुशबू की  तरह महकेंगे अशआर  भी मेरे
यह माजरा    है इश्क़ का    कैसे  छुपा रहे

मायूस   जिंदगी    से रहे    कैसे वह भला
जिस शख्स की ज़ुबान पर शुकरे खुदा रहे

ज़ीशान    कामयाब    तू होगा   जरूर गर
रब पर    यक़ीन    और लबों पर दुआ रहे

✍ ज़ीशान आज़मी

میری     حیات کی      ترے      لب   دعا رہے
میں   چاہتا    نہیں   تو     سدا    بے وفا رہے

اک   بار    مل   کے تو مرے  دل  کو قرار دے
زخمِ جگر      نہ     میرا    ہمیشہ     ہرا   رہے

دل ہے   کہ   بھولتا    نہیں   تصویر    یار کی
کوشش تو کی تھی دل میں کوئی دوسرا رہے

ملتا ہوں   روز   روز میں محبوب  سے  مرے
آنکھوں   میں  ایسا خواب ہمیشہ   سجا رہے

خوشبو کی طرح مہکے نگے اشعار  بھی مرے
یہ   ماجرا    ہے   عشق کا   کیسے  چھپا رہے

مایوس    زندگی    سے   رہے کیسے  وہ بھلا
جس    شخص    کی  زبان پہ  شکرِ خدا رہے

ذیشان    کامیاب     تو     ہوگا    ضرور   گر
رب پر    یقین     اور      لبوں    پر  دعا  رہے

✍ ذیشان آعظمی

Friday, March 15, 2019

Sine me daagh hai ke mitaaya na jayega

खुशबू है प्यार   इसको  छुपाया न जाएगा
बिन इस के एक   लम्हा गुज़ारा न जाएगा

कसमें ना   दीजिए कि   मुलाकात हो सके
मुमकिन है हमसे वादा निभाया ना जाएगा

लाज़िम है जिंदगी  में तेरा  साथ हर क़दम
हम  से क़दम  अकेले  उठाया   ना जाएगा

गुज़रेगी   रात युं ही    अंधेरे    में बिन  तेरे
तन्हा चिराग़   हमसे    जलाया   न जाएगा

कैसे भुला   दूं तुमको,   तेरी मीठी याद का
सीने में दाग़ है   कि    मिटाया   न जायेगा

दर्दे जुदाई   पूछो न   ज़ीशान    से    कभी
शायद यह    दर्द इससे   बताया न जाएगा

✍ ज़ीशान आज़मी

خوشبو    ہے پیار   اس کو چھپایا نہ جائے گا
بن اس   کے    ایک    لمحہ   گزارا نہ جائے گا

قسمیں   نہ    دیجئے   کہ    ملاقات   ہو سکے
ممکن    ہے     ہم  سے وعدہ نبھایا نہ جائے گا

لازم    ہے     زندگی    میں   ترا ساتھ ہر قدم
ہم  سے    قدم     اکیلے     اٹھایا    نہ جائے گا

گزرے گی رات یوں ہی اندھیرے میں بن ترے
تنہا    چراغ     ہم     سے    جلایا نہ  جائے گا

کیسے    بھولا دوں    تم کو تری میٹھی یاد کا
سینے    میں    داغ ہے    کہ  مٹایا  نہ جائے گا

دردِ جدائی    پوچھو     نہ ذیشان    سے کبھی
شاید یہ    درد     اس    سے   بتایا نہ جائے گا

✍ ذیشان آعظمی

Monday, March 11, 2019

Aayiye Dil nichodh kar dekhein

नफ्स  अपना   झिंझोड    कर देखें
राहे हक़   पर भी    दौड़   कर देखें

दिल को आराम मिलता है कि नहीं
हम अना   अपनी    छोड़  कर देखें

दोस्त! आसान   काम है    कि नहीं
टूटी पत्ती   को    जोड़    कर   देखें

ख्वाहिशों   की  हमारी  हद है कोई?
आईये दिल  निचोड़कर   कर  देखें

चुप है    ज़ीशान    मुद्दतों   से चलो
उस की    खामोशी    तोड़कर  देखें

✍ ज़ीशान आज़मी

مصرع : آئیے دل نچوڑ کر دیکھیں
افاعیل: فاعلاتن مفاعلن فعلن

نفس اپنا   جھنجھوڑ  کر  دیکھیں
راہِ حق    پر  بھی دوڑ کر دیکھیں

دل کو   آرام    ملتا   ہے   کے نہیں
ہم   انا    اپنی   چھوڑ  کر دیکھیں

دوست!   آسان   کام   ہے کے نہیں
ٹوٹی    پتی    کو جوڑ کر دیکھیں

خواہشوں کی ہماری حد ہے کوئی؟
آئیے   دل     نچوڑ     کر   دیکھیں

چپ ہے   ذیشان    مدتوں سے چلو
اس  کی  خاموشی توڑ کر دیکھیں

✍ ذیشان آعظمی