Monday, March 18, 2019

Jis Shakhs ki zubaan pe shuk-e-khuda rahe

मेरी    हयात कि    तेरे लब   पर दुआ  रहे
मैं   चाहता    नहीं  तू    सदा    बेवफा रहे

एक बार मिल के तू मेरे  दिल को क़रार दे
ज़ख्मे  जिगर   ना मेरा   हमेशा   हरा  रहे

दिल है   कि भूलता  नहीं  तस्वीर यार की
कोशिश तो की थी दिल में कोई दूसरा रहे

मिलता हूं   रोज-रोज   मैं   महबूब  से मेरे
आंखों में   ऐसा   ख्वाब   हमेशा सजा रहे

खुशबू की  तरह महकेंगे अशआर  भी मेरे
यह माजरा    है इश्क़ का    कैसे  छुपा रहे

मायूस   जिंदगी    से रहे    कैसे वह भला
जिस शख्स की ज़ुबान पर शुकरे खुदा रहे

ज़ीशान    कामयाब    तू होगा   जरूर गर
रब पर    यक़ीन    और लबों पर दुआ रहे

✍ ज़ीशान आज़मी

میری     حیات کی      ترے      لب   دعا رہے
میں   چاہتا    نہیں   تو     سدا    بے وفا رہے

اک   بار    مل   کے تو مرے  دل  کو قرار دے
زخمِ جگر      نہ     میرا    ہمیشہ     ہرا   رہے

دل ہے   کہ   بھولتا    نہیں   تصویر    یار کی
کوشش تو کی تھی دل میں کوئی دوسرا رہے

ملتا ہوں   روز   روز میں محبوب  سے  مرے
آنکھوں   میں  ایسا خواب ہمیشہ   سجا رہے

خوشبو کی طرح مہکے نگے اشعار  بھی مرے
یہ   ماجرا    ہے   عشق کا   کیسے  چھپا رہے

مایوس    زندگی    سے   رہے کیسے  وہ بھلا
جس    شخص    کی  زبان پہ  شکرِ خدا رہے

ذیشان    کامیاب     تو     ہوگا    ضرور   گر
رب پر    یقین     اور      لبوں    پر  دعا  رہے

✍ ذیشان آعظمی

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