Tuesday, April 2, 2019

Kis ko khabar hai kon sa aansoo qabool ho

رحمت کا    قبر    پر میری    یا   رب نزول ہو
وہ آئے    اس کے    ہاتھ    عقیدت کا پھول ہو

میں دور   اس    لئے ہوں شراب و شباب سے
منظور ہی    نہیں    مجھے   خرچہ فضول ہو

اس دور    میں    کمی نہیں ظالم کے ظلم کی
مظلوم    کی    دعا مرے     خالق    قبول  ہو

وعدہ خلافی   مجھ  سے کیا تجھ کو کیا ملا
لعنت خدا کی تجھ پہ ترے منہ میں دھول ہو

میں روکتا    ہوں سب    کو برائی سے یا خدا
چلتا ہوں    نیک  راہ پہ مجھ سے نہ بھول ہو

ظالم تو   آنسوؤں    سے    ڈرا کر    کہ آہ سے
کس کو    خبر ہے    کون   سا آنسو   قبول ہو

ذیشان کی    تمنا    ہے   یا رب وہ خواب میں
جب    دیکھے   رات  میں تو نبی و رسول ہو

✍ ذیشان آعظمی

रहमत का    कब्र पर     मेरी  या रब नूज़ूल हो
वह आए     उसके हाथ अकीदत  का फूल हो

मैं दूर      इसलिए    हूं      शराबो     शबाब से
मंज़ूर ही    नहीं    मुझे     खर्चा    फुज़ूल   हो

इस दौर में    कमी नहीं   ज़ालिम के ज़ुल्म की
मज़लूम    की दुआ    मेरे ख़ालिक़   क़ुबूल हो

वादा खिलाफी मुझसे किया तुझको क्या मिला
लानत   खुदा की    तुझ पे तेरे   मुंह में धूल हो

मैं रोकता    हूं सब    को    बुराई   से, या खुदा
चलता हूं नेक     राह पे     मुझ    से न भूल हो

ज़ालिम तू    आंसुओं से डरा कर    के आह से
किसको खबर    है कौन    सा  आंसू क़ुबूल हो

ज़ीशान की तमन्ना है    या रब    वह  ख्वाब मे
जब देखे    रात में तो     नबी    ओ    रसूल हो

✍ ज़ीशान आज़मी

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