Monday, June 3, 2019

Phir baat mere man ki man me rah gayee

न जाने   उम्र    कौन     से   मदफन में रह गई
एक ज़िंदगी थी    क़िमती   उलझन  में रह गई

मुझको    नहीं था    शौक़ जवानी का हाँ मगर
यह   आरज़ू    मेरी   बचपन    में     रह    गई

यह मुजेज़ा किताबे    खुदा   का    नहीं तो क्या
आयत जो दिल में उतरी वह धड़कन में रह गई

कुछ    बात मैं   कहूं    कि   सभी  टोकने   लगे
फिर बात    मेरे   मन की  मेरे    मन  में रह गई

देखा    था ख्वाब    मैंने  जो अहलो अयाल का
ज़ीशान एक   वो याद   भी    गुलशन में रह गई

✍ ज़ीशान आज़मी

نہ جانے عمر کون    سے   مدفن  میں رہ گئی
اک زندگی تھی    قیمتی الجھن میں رہ گئی

مجھ   کو نہیں  تھا شوق جوانی کا ہاں مگر
یہ ایک    آرزو    مری     بچپن   میں رہ گئی

یہ معجزہ   کتابِ    خدا    کا    نہیں  تو کیا
آیت جو دل میں اتری وہ دھڑکن میں رہ گئی

کچھ   بات میں  کہوں کہ   سبھی ٹوکنے لگے
پھر بات  میرے من کی مرے من میں  رہ گئی

دیکھا تھا  خواب   میں   نے جو اہل و عیال کا
ذیشان اک   وہ     یاد بھی  گلشن میں  رہ گئی

✍ ذیشان آعظمی

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