Wednesday, July 10, 2019

Hamara dahr me zinda imaam hai ke nahi

रसूले हक़   पे दुरुद ओ  सलाम   है के नहीं
नबी का   आज भी  देखो क़याम है के नहीं

ग़रज़ है  क्या हमें   कोई  किताब पढ़ने की
नबी का  क़ौल  ख़ुदा  का कलाम है के नहीं

अली की बात  तू करता है सुबह शाम मगर
हमें बता    अली   अव्वल  इमाम है के नहीं

बक़ाए अरज़ो  समा   देखकर यह  बतलाव
हमारा   दहर में   जिंदा इमाम    है  के नहीं

मैं अहले बैत की ज़ीशान आशिकी में जिया
बता के मुझ  पे जहन्नम   हराम है   के नहीं

✍ ज़ीशान आज़मी

رسولِ حق   پہ   درود و سلام ہے کے نہیں
نبی کا    آج بھی  دیکھو قیام ہے کے نہیں

غرض ہے   کیا ہمیں کوئی کتاب پڑھنے کی
نبی کا   قول    خدا   کا   کلام ہے کے نہیں

علی کی بات   تو کرتا ہے صبح و شام مگر
ہمیں    بتا     علی    اول امام ہے کے نہیں

بقائے  ارض و سما     دیکھ   کر   یہ بتلاؤ
ہمارا     دہر     میں زندہ امام ہے کے نہیں

میں اہل بیت کی ذیشان عاشقی میں جِیا
بتا کہ   مجھ پہ   جہنم حرام ہے کے نہیں

✍ ذیشان آعظمی

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